:
Breaking News

राहुल गांधी पर शकील अहमद का तीखा हमला, कांग्रेस नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना:कांग्रेस से अलग राह पकड़ चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और खास तौर पर राहुल गांधी पर गंभीर और असहज कर देने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह दावा कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है कि उन्हें अपनी ही पुरानी पार्टी से खतरा महसूस हो रहा है और उनके पटना व मधुबनी स्थित आवास पर हमले की आशंका है।
डॉ. शकील अहमद ने सोशल मीडिया और एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के जरिए कांग्रेस के आंतरिक कामकाज पर खुलकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रह गई है और नेतृत्व कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव में काम करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि राहुल गांधी से अंत में जो व्यक्ति मिलता है, वही अंतिम फैसले को दिशा देता है, चाहे पहले कितनी भी चर्चाएं क्यों न हुई हों।
पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक रणनीति पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध पर टिकी हुई है। उनके मुताबिक, यदि मोदी अलोकप्रिय नहीं हुए तो कांग्रेस और राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े हो जाएंगे। उन्होंने अपने एक पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद मोदी सतर्क और सजग नेता हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व जमीनी हकीकत से कटता जा रहा है।
मुस्लिम नेतृत्व पर उपेक्षा का आरोप
डॉ. शकील अहमद का सबसे तीखा हमला कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेतृत्व की भूमिका को लेकर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी यह मानकर चल रही है कि मुस्लिम वोट स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के पास रहेंगे, इसलिए मुस्लिम नेताओं की जरूरत नहीं समझी जा रही। उनका कहना है कि यही सोच कांग्रेस को भीतर से कमजोर कर रही है और पार्टी के भीतर असंतोष को जन्म दे रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अब कांग्रेस में एक नया ‘शकील इफेक्ट’ दिख सकता है, जहां नेतृत्व आलोचनाओं के बाद प्रतीकात्मक तौर पर पुराने नेताओं और अल्पसंख्यक चेहरों के साथ दिखने की कोशिश करेगा, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव की संभावना कम है।
हमले की आशंका और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
डॉ. शकील अहमद ने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस के कुछ स्थानीय और युवा संगठन उनके खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन की आड़ में हिंसक कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
इस पूरे विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के भीतर से ही कुछ नेताओं ने माना है कि पार्टी में मुस्लिम नेतृत्व को लगातार नजरअंदाज किया गया है। वहीं जदयू नेताओं ने डॉ. शकील अहमद के आरोपों को कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र की कमजोरी से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी में लोकप्रिय नेताओं के उभरने से नेतृत्व असहज हो जाता है।
कांग्रेस के लिए चेतावनी या व्यक्तिगत नाराजगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. शकील अहमद के बयान सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर लंबे समय से दबे असंतोष की आवाज भी हो सकते हैं। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इन आरोपों को गंभीरता से लेकर आत्ममंथन करेगा या इसे एक असंतुष्ट नेता की प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज कर देगा। फिलहाल, यह विवाद बिहार की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय सियासत में भी नई बहस छेड़ चुका है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *